Monday, December 11, 2017



மஹாகவி பாரதி


மஹாகவி பாரதி ஒரு சகாப்தம். இதில் இருவேறு கருத்துகள் இல்லை முற்றிலும் உண்மை. பாரதி ஒரு மஹாகவி இதுவும் நூற்றுக்கு நூறு உண்மை தான்.

Friday, December 8, 2017




Hindu Munnani strongly condemns the communal triggering speech of Viduthalai Siruthai Katchi leader Thirumavalavan. Participating in a Dalit-Islamist Uprising meeting held on December 6, 2017 in Perambur, Chennai, he said that Buddha Vihar should be built demolishing Hindu temples in India citing Kanchi Kamakshi Amman Temple and Sri Rangam Temple, Trichy.

Saturday, December 2, 2017




Kanyakumari witnessed torrential wind and rain unleashed by Cyclone Ockhi after 25 years ravaging the southernmost tip of Bharat. According to sources, around 10 lakh banana trees, one lakh trees, were uprooted and the roads were blocked. Communication lines were disrupted.

Monday, November 27, 2017



Around 50 RSS swayamsevaks planted tree saplings in Gangadeeshwar Temple, Purasaiwalkkam. Shri Kalyan Singh, Chennai Mahanagar Sanghachalak, Shri Raghavan, Chennai Mahanagar Karyavah, Shri Prakaash, Prant Sampark Pramuk, Shri Parshvakumar, Perambur Bagh Sanghachalak guided.




उडुपी, 26 नवम्बर। धर्मसंसद के तृृतीय अंतिम दिवस की अध्यक्षता मणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास जी महाराज, अयोध्या ने की। गोरक्षा के संदर्भ में प्रस्ताव की भूमिका रखते हुए विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय उपाध्यक्ष श्री हुकुमचंद सांवला ने कहा कि भारत की पहचान गाय है। गाय समरसता की देवी है। गाय किसी में भेद नहीं करती। मानव को शाकाहारी गाय ने ही बनाया है। अतः अहिंसा की देवी भी गाय ही है। अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का आधार भी गाय ही है। घर-घर गाय, ग्राम-ग्राम गौशाला-यही है भारत की निरोगशाला। गोपाल के देश में प्रतिदिन गाय की हत्या हो रही है। अंग्रेजों के देशों में घोड़ों की हत्या पर, मुस्लिम देशों पर सुअर की हत्या पर प्रतिबंध है तो भारत में गौहत्या पर प्रतिबंध क्यों नहीं? डोजियर गोभक्तों का नहीं गौभक्षकों का बनना चाहिए। नोडल आफिसर गौमांस के निर्यातकों पर निगाह रखे। भारत से किसी भी प्रकार गौमांस निर्यात बंद हो। इसके लिए केन्द्रीय कानून बने और गौहत्यारों को फांसी की सजा हो। प्रस्ताव का वाचन करते हुए अखिलेश्वर दास जी महाराज, गुजरात ने कहा कि करपत्री जी महाराज ने वर्षों पूर्व गोहत्या का विषय उठाया था। विश्व हिंदू परिषद भी समय-समय पर उठाती रही है। गुजरात के सभी संतों ने मिलकर सरकार पर दबाव बनाया तो सरकार ने गुजरात में कठोर कानून बनाया। धर्म संसद मांग करती है कि संसद में कानून बनाए ताकि गौहत्या बंद हो और गौहत्यारों को फांसी हो। गौरक्षा के लिए जिन-जिन लोगों ने बलिदान दिया संतों ने आश्रम छोड़कर गौरक्षा के लिए कार्य किया ऐसे गौरक्षकांे पर अनावश्यक टीका-टिप्पणी करें। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए नामधारी संत सद््गुरु दिलीप सिंह जी महाराज ने कहा कि हिंदू और सिख सगे भाई हैं, अलग-अलग नहीं। सिख धर्म में गौ और गरीब की सेवा का संकल्प है। छठे गुरु हरगोविन्द जी ने भी गौरक्षा की थी। नामधारी सिखों ने गौरक्षों के लिए अनेक बलिदान दिए हैं। 

Sunday, November 26, 2017


उडुपी, 25 नवम्बर। धर्म संसद के आज के अधिवेशन की अध्यक्षता मुम्बई के पूज्य स्वामी विश्वेश्वरानंद जी महाराज ने की। इस सत्र में विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष डाॅ. प्रवीण भाई तोगडिया ने विश्व हिन्दू परिषद का निवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि अस्पृृश्यता शास्त्रसम्मत नहीं है। वेदों सहित किसी भी धर्मशास्त्र में अस्पृृश्यता की मान्यता नहीं है। विश्व हिन्दू परिषद भारत से अस्पृृश्यता के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध है। उडुपी में 1969 से प्रारंभ हुआ यह अभियान अपना प्रभाव दिखा रहा है। राम जन्मभूमि का शिलान्यास एक दलित कार्यकर्ता कामेश्वर चैपाल द्वारा करवाकर व डोम राजा के घर पर संतों का भोजन कराकर विश्व हिन्दू परिषद ने अपने संकल्प को आगे बढ़ाया है। अब ‘‘हिंदू मित्र परिवार योजना’’ के द्वारा लाखों हिंदू दलित बन्धुओं के साथ पारिवारिक सौहार्द निर्माण कर रहे हैं। ‘‘एक मंदिर, एक कुंआ, एक श्मशान-तभी बनेगा भारत महान््’’ का मंत्र सारे भारत में घूम रहा है। अमरावती महाराष्ट्र से पधारे पूज्य जितेन्द्रनाथ जी महाराज ने अस्पृृश्यता उन्मूलन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि समरसता के लिए यह समय सबसे अधिक उपयुक्त है। समरसता का मंत्र साकार होते हुए दिखाई दे रहा है। महामहिम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री समरसता के जीवंत उदाहरण हैं। वेदों व शास्त्रों के अध्ययन का अधिकार सबको मिलना चाहिए। भारत के सभी संत मिलकर अस्पृृश्यता का कलंक मिटाने का संकल्प लेते हैं। यह समाप्त होगी ही और समरस भारत एक महाशक्ति के रूप में प्रकट होगा। जब हमारे इष्ट देवों की कोई जाति नहीं तो भक्तों की कैसे हो सकती है?




उडुपी  24 नवम्बर। धर्मसंसद के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए पेजावर पीठाधीश्वर पूज्य विश्वेशतीर्थ जी महाराज ने आज स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि सब प्रकार की बाधाओं को दूर करके एक साल के अंदर ही श्रीराम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो जायेगा। उडुपी में किसी भी धर्मसंसद में किया गया संकल्प हमेशा पूरा हुआ है। 1969 में अस्पृश्यता दूर करने का संकल्प लिया था 1985 की धर्मसंसद में श्रीराम जन्मभूमि का ताला खोलने का संकल्प लिया था। जिस तरह वे दोनों संकल्प साकार हो चुके हैं उसी प्रकार यह तीसरा संकल्प भी पूरा होगा। धर्मसंसद में उपस्थित संतों ने करतल ध्वनि और जयश्रीराम के घोष के साथ इस घोषणा का स्वागत किया। पूज्य महाराज जी ने अस्पृश्यता को कालकूट विष का नाम देते हुए कहा कि इसका निवारण अवश्य होना चाहिए। देश में बहुसंख्यक अल्पसंख्यक का भेद खत्म करने के लिए उन्होंने आह्वान किया कि यदि आवश्यक हो तो संविधान संशोधन भी करना चाहिए लेकिन यह भेद समाप्त होना चाहिए।