Sunday, July 1, 2012

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मिशनरी संस्था के  'ह्युमन त्राफिक्किंग' का खुलासा
कन्याकुमारी जिले में  'ब्लेस्सिंग ट्रस्ट' नामके मिशनरी संस्था  द्वारा चालित अनाथालयों  में ओडिशा और झारखण्ड के ३७ बच्चे क़ैद करके रखे हुए हैं यह समाचार राज्य में एक झटका लगा दी जब राज्य  के सामाजिक कल्याण विभाग ने राज्य में 'ह्युमन त्राफिक्किंग' के बारे में तत्य खोद कर  निकाला. ये बच्चे जिनका आयु १० साल के अन्दर है इनके माता पिता को इस वादा देकर लाये गए की इनको अच्छी पड़ाई मिल जायेगी. "लेकिन  इनको स्कूल तक भेजा गया. सब  बच्चे एक ही कमरे में बंद अमानवीय स्थिति में झूज रहे थे",  बोले ओडिशा के समग्र शिशु संरक्षण योजना के प्रांतीय  समन्वयक प्रदीप के. पात्रा, जो इन दिनों तमिलनाडु के दौरे पर हैं.

हिन्दू देवी देवता को गाली देने वाली पाट्य पुस्तिका हटाया गया 

जिन बारह विष्णु भक्त संत को 'आल्वर' बताते है इन में से एक और इकलौती महिला संत श्री आंडाल भूमाता की अवतार मानी जाती है. ऐसे पवित्र देवी को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले स्थित एम् एस विश्व विद्यालय के एक पाट्य पुस्तक ने "वेश्या पुत्री" बताकर अवहेलना की है.  इसको लिखने वाले दानिएल सेल्वाराज एक कम्युनिस्ट है. पुस्तक को स्वीक्र्ती देने वाली समिति की अद्याक्षा है श्रीमती प्यूला कुमारी नाम के इसाई है.  पड़ने वाले छात्रों के माता पिता गुस्से में आकर विश्व विद्यालय को सैख्डों -मेल भेजकर, हिन्दू देवी देवताओं की अवहेलना असहनीय है यहाँ सूचित की. तुरंत विश्व विद्यालय को उस पाट्य पुस्तक को वापिस लेना पड़ा. राज्य शासन को बी उस पुस्तक से विवादाक्र्स्ता अंश हटाया गया. ऐसा सूचना प्रकाशित करना पड़ाविवादाक्र्स्ता पाट्य पुस्तक के बारे में जागरण कार्य .भा.वि. के विद्यार्थी गण सम्पन्न किया. हिन्दू देवता को कलंकित करने के वृद्ध हिन्दू मुन्नानी के कार्यकर्ता विश्व विद्यालय को घेरने गए. तब विश्व विद्यालय के रेगिस्त्रार आश्वासन दिया की उक्त पाट्य पुस्तक वापस ले ली जायेगा 

हिन्दू मंदिर आर टी अई के अंतर्गत : चेन्नई उच्च न्यायालय   

हिन्दू मंदिरों में सूचना अधिकारी की नियुक्ति हो जाय करके हेच आर & सी  आयुक्त द्वारा पेश की गयी एक परिपत्र के वृद्ध एक मंदिर के न्यासी न्यायलय के द्वार खटखटाया. इस याचिका को ख़ारिज करते हुए चेन्नई उच्चा न्यायालय एक निर्णय सुना दी कि मंदिर एक सार्वजनिक स्थल है और वह आर टी अई के अंतर्गत जाती है यद्यपि वह वंशानुगत न्यासी द्वारा संचालित हो. लेकिन हिन्दुओं की मांग है कि मंदिरों से शासन का हात हटाया जाय तथा गण्य मान्य प्रख्यात हिन्दू सज्जन द्वारा मंदिर का प्रशासन हो जाय. इसलिए यह निर्णय अमान्य है.

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