Friday, April 6, 2012

vsk chennai sandesh (Hindi)


चेन्नई सन्देश
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संवाद भी, संस्कार भी
मार्च ६, २०१२
हिन्दू मुन्ननी नेता गोपालन जी गायल
हिन्दू मुन्ननी के नेता श्री राम गोपालन, ८५, प्रवास पर कल ईरोड शहर में थे. वहां स्नान गृह में पांव फिसलने से गायल हुए. वहां के एक निजी अस्पताल में बरती हुए. डाक्टरों का कहना है कि गोपालनजी सुधर रहे हैं. गोपालनजी संघ के वरिष्ठ प्रचारक हैं. इरोड के पास भवानी शहर में एक बड़े दीप पूजन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे गए थे.

हिन्दूओ के हाथ अधिकार, तो  न्याय के सात व्यवहार
पुनीत तीर्थ क्षेत्र मंडाईकाडु कन्याकुमारी जिले में है. हर साल मार्च महीने 'कोडाई' उत्सव होता है, जब लाखों श्रद्धालु माँ भगवती के दर्शनों के लिए वहां एकत्रित होते हैं. उसी समय सैकड़ों दूकाने वहां खोले जाते जो चर्च के अधीन लोगों द्वारा संचालित हैं. हिन्दू व्यापारी वंचित रह जाते. और  शासन कर वसूल भी न कर पाती थी. सरकार को इसी वजह से २.५ लक्ष रूपये तक का घाटा हुआ करती थी.  इतने में हिन्दुओं का निश्चय से विकास खंड सभा मेंबर दस के दस भा ज पक्ष के निर्वाचित हुए. वे तुरंत सर्व सम्मती से प्रस्ताव भी पारित की कि सब मतावलंबी लोगों के साथ समान बर्ताव हो. इतने में सरकारी कर्मचारी लोगों ने  इस  में पानी फेरने का प्रयास की. पर हिन्दू जन प्रतिनिधि अडिग रहे. परिणाम स्वरुप इस साल उत्सव के समय श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतया अनुकूल वातावरण था.
पीढ़ी दर पीढ़ी पुण्याई दो परिवार द्वारा
नायनमार ६३ होते हैं जो शिव भक्त संत हैं. इन में सब जाती के होते हैं. इनको राज्य के बड़े शिव मंदिरों में पूजा होती है. वसंत उत्सव  के समय (मार्च - एप्रल) इन ६३ संतों के पालकी जुलूस को प्रमुख स्थान है. चेन्नई मयिलापुर कपाली शिव मंदिर के उत्सव में भी ऐसे ही होता है जब लाखों भक्त आज ही पैदल चल कर आते है नायनमार दर्शन के लिए. इन भक्त लोगों की सेवा करते है दो परिवार, ११ पीढ़ी से. भक्त को भूख मिठाने अन्न देते  हैं, पीने का पानी देते हैं, बस यही सेवा. पर पीढ़ी दर पीढ़ी हर साल करते आए हैं. दोनों परिवार कारपेंटर समूह के हैं. एक परिवार के संतान श्री श्रीनिवासन, ७८, कहते है: "हमारे परिवार के हर पीढ़ी  में इकलौता  पुत्र हुआ करता है, फिर भी भक्त सेवा अक्षुण रह रहा है." दुसरे परिवार के श्री बालु का कहना है, "यह भी एक प्रकार की उपासना ही है, इसे हम लगातार करते रहेंगे’'. इनके पिता ९३ आयु में भी इसा सेवा में सक्रिय भाग लेते हैं.     
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